Famous Tourist Places in Bihar

इस blog के सफर में दोस्तों हम बिहार के top five tourist places की सफर करेंगे जिनसे बिहार तो जाना जाता है, साथ में भारत भी इनसे जाना जाता है। इस सफर में हम महाबोधि मंदिर, गोलघर, पटना Museum, barabar caves और giant buddha कुछ खास बातों के बारे में जानेँगे।

महाबोधि मंदिर

महाबोधि मंदिर मुख्‍य मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की निर्माण सम्राट अशोक द्वारा किया गया है। इस मंदिर में भगवान बुद्ध की एक बहुत बड़ी मूर्त्ति है।
जो पदमासन अवस्था में है। और यह ठीक उसी जगह स्‍थापित है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्‍त हुआ था। मंदिर लगभग 4.8 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है। और इसके चारों ओर पत्‍थर की नक्‍काशीदार रेलिंग है। जो बोधगया में सबसे पुराना अवशेष माना जाता है। इस मंदिर परिसर के दक्षिण-पूर्व दिशा में प्रा‍कृतिक संसाधानों से समृद्ध एक पार्क है जहां बौद्ध भिक्षु साधना करते हैं और आम लोग भी इस पार्क में मंदिर प्रशासन की permmision से जा सकते हैं।

इस मंदिर में उन सात स्‍थानों को भी चिन्हित किया गया है जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद सात सप्‍ताह बिताया था। जातक कथाओं के अनुसार बोधि वृक्ष जो एक विशाल पीपल का वृक्ष है और यह मुख्‍य मंदिर के पीछे स्थित है। कहा जाता है की भगवान बुद्ध को इसी वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। कहा जाता है कि वर्तमान में जो बोधि वृक्ष है वह उस वृक्ष की पांचवीं पीढी है। मंदिर में सुबह के समय की घण्‍टों की आवाज मन को एक अजीब सी शांति प्रदान करती है।

गोलघर

गोलघर, बिहार की राजधानी पटना में गाँधी मैदान के पश्चिम में है। आपको यह जान के हैरानी होगी कि 1770 के समय आई भयंकर सूखे के दौरान लगभग एक करोड़ लोग भुखमरी के शिकार हुए थे। तब उस समय के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग ने गोलघर को बनाने की सोची थी,जो बाद में ब्रिटिश इंजिनियर कैप्टन जान गार्स्टिन ने अनाज़ के (ब्रिटिश फौज के लिए) भंडारण के लिए इस गोल ढाँचे का निर्माण 20 जनवरी 1784 को शुरु करवाया था। जो जाकर ब्रिटिश राज में ही 20 जुलाई 1786 को पूरा हुआ था। इसमें एक साथ 140000 टन अनाज़ रख सके इतना जगह बनाया गया था।

इस गोलघर की ऊँचाई 29 मीटर है। और दोस्तों यह जान के आश्चर्य होगी आपको की इसमें कोई असतंभ नहीं है, साथ में इसकी दीवारे 306 मीटर मोटी है। गोलघर के ऊपर लगभग 3 मीटर ईटो के जगह पत्थरों को बिछाया गया है। गोलघर के ऊपर 2 फीट 7 इंच का एक छेद है जो अनाज डालने के लिए रखा गया है, जिसे रखने के बाद बंद कर दिया जाता है। इस घर में 145 सीढिया है जिससे ऊपर की तरफ जा सकते है। और दोस्तों शहर का एक बड़ा सा हिस्सा यहाँ से साफ देखा जा सकता है जो एक अलग अहसास को जन्म देता है। गंगा के मनोहारी दृश्य का आनंद भी आप यहाँ से ले सकते है।

Patna Museum

इतिहास की माने तो यह 1912 में बंगाल से बिहार के अलग होने के बाद एक Museum की जरुरत महसूस की गई। उस समय के गवर्नर चार्ल्स एस बेली की अध्यक्षता में एक बैठक रखी गई जिसमे बिहार और उड़ीसा साथ थे। इस बैठक में दोनों के सहमति से इस Museum को बनाने के प्रस्ताव को पारित किया गया था।

कुछ समय बाद यानि 20 जनवरी 1915 को तत्कालीन गवर्नमेंट हाउस में संग्रहालय की स्थापना की गई थी। वर्तमान समय जहाँ Museum है उस भवन में Museum 1 फरवरी 1929 में लाया गया था। बिहार-उड़ीसा के तत्कालीन गवर्नर सर लैंसडाउन स्टीदेंसन ने 7 मार्च 1929 को इस Museum का उद्घाटन किया था।

Barabar Caves

चौथे स्थान पर barabar caves है जिसे अशोक ने अपने राजविषेक के 19 वे साल में बनवाया था। जो लगभग 322-185 ईसा पूर्व बना था।

barabar caves बिहार के जहानाबाद जिले में स्थित है जो गया से लगभग 24 km की दुरी पर स्थित है। ये गुफाएं चट्टानों को काटकर बनाई गई है जो काफी पुरानी है। और जानकारों का यह भी कहना है कि इसमें अधिकतर गुफाएं मौर्य काल से है। barabar caves की लगभग सभी गुफाएं दो कमरों को मिला के बनी है जो पूरी तरह से ग्रेनाइट की बनी हुई है। जिसमे पहला कमरा भक्तो के लिए बनाया गया था और दूसरा कमरा जो पहले वाले से छोटा था पूजा पाठ के लिए बनाया गया था। इन गुफाओ का इस्तेमाल आजीविका सन्याशि करते थे। यह सन्याशि वर्षा के मौसम में बारिश से बचने के लिए भी इसका उपयोग किया करते थे। इसके आलावा यहाँ पर चट्टानों से बनी हुई कई बौद्ध और हिन्दू मुर्तिया पाई गई है।

बराबर पहाड़ियों में बसी ये तीन गुफाए है जो सुदामा, कर्ण और लोमांस ऋषि की नाम से जाना जाता है। शुरू के दो का उपयोग सभा के लिए किया जाता था और तीसरे का रहने के उपयोग में किया जाता था।

इन सभी गुफाओ के दीवारों और छतो पर एक पॉलिश देखी जा सकती है। जिस पर आप आज हाथ फेरे तो ऐसा मासूस होगा की ये कल ही पॉलिश कराई गई हो।

Giant Buddha

अब दोस्तों हम बात करते है Giant Buddha की , जिसकी height 25 m. है और जो भारत के इतिहास में पहला है। इसे Daijokyo द्वारा 1982 में इसकी शुरुआत की गई और सात साल बाद 1989 में इसे पूरा किया गया था। इतनी बड़ी प्रतिमा को बनाने में सात साल लग गए थे और 12000 राजमिस्त्रीओं ने इसे बनाया था। और इसे The 80-foot Buddha Statue के नाम से भी जाना जाता है।

दोस्तों इस ब्लॉग में हमलोगो ने बिहार के top five historical places के बारे में जाना है और हम सभी को एक बार इसे देखने जरूर जाना चाहिए। इसी के साथ हम इस blog को यही समाप्त करे हुए और अगले blog में फिर नए topic के साथ फिर मिलते है। इस blog को पड़ने के बाद आप अपने सुझाव और प्रश्न नीचे कमेंट बॉक्स में post कर सकते है।

धन्यवाद !!!

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