आखिर क्यों है बिहार नाम इस राज्य का | History of Bihar

सुबह की शुरुआत लिट्टी चोखे के साथ और उगते सूर्य के साथ अपनी दिनचर्या की शुरुआत करने वाले लोगों के क्षेत्र में यदि आप पहुंच रहे हैं, तो यकीनन आप बिहार (History of Bihar) की धरती पर हैं।

बिहार स्वयं में अपनी समृद्ध संस्कृति और कला क्षेत्र को लेकर पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यहां मनाया जाने वाला छठ पर्व जिसमें भगवान भास्कर की पूजा की जाती है, पूरे विश्व में एक अलग ही आस्था प्रस्तुत करती है।यह क्षेत्र अपनी कला में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशमान है। उदाहरणतः यहां की मधुबनी पेंटिंग, जो अपनी अद्भुत शैली के कारण देश विदेश के लोगों के द्वारा पसंद की जाती है। वहीं बिहार के बारे ऐसा कहा जाता है कि देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी को उत्तीर्ण करने वाले ज्यादातर छात्र बिहार के ही होते हैं। बिहार में सिने जगत में भी अपनी पहचान कायम की है। बिहारी बाबू कहे जाने वाले शत्रुघ्न सिन्हा, नेहा शर्मा, शेखर सुमन, पंकज त्रिपाठी, मनोज बाजपेई तथा सुशांत सिंह राजपूत आदि ने अपनी पहचान स्थापित की है। जहां की बेटियां भी किसी क्षेत्र में पिछड़ी नहीं है,बिहार के मुजफ्फरपुर क्षेत्र के लेफ्टिनेंट शिवांगी 2 दिसंबर 2019 को नौसैन्य पायलट के रूप में चुने जाने वाली पहली महिला है।उस्ताद बिस्मिल्लाह खान जिन्हें भारत रत्न, पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सम्मान से सम्मानित किया गया, वे भी बिहार की पावन पूज्य धरती पर जन्मे थे।

बिहार की समृद्धि आदि काल से ही अत्यंत प्रभावशाली रही है। आइए हम बिहार के उद्भव के बारे में संपूर्ण जानकारी आपके साथ साझा करते हैं।

आखिर क्यों है बिहार (History of Bihar) नाम इस राज्य का:

प्रतापी सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म की दीक्षा लेकर राज्य में अनेक बौद्ध स्तूप और धार्मिक मठो का निर्माण किया। ऐसे धार्मिक स्थानों को बौद्ध विहार कहा गया। ऐसा अनुमान है कि इस क्षेत्र में ऐसे बौद्ध विहारो की बहुलता को देखकर बाद में आने वाले लोगों ने इसे बिहार नाम से पुकारना शुरू कर दिया।
बिहार की राजधानी वर्तमान में पटना है जिसे पूर्व में पाटलिपुत्र, पुष्पपुर, कुसुमध्वज, श्रीनगर, पोलीबोथा आदि नामों से जाना जाता था।

आइए जानते हैं प्रारंभिक बिहार से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों को:

रामायण में वर्णित मां सीता का जन्म जनकपुर (वर्तमान सीतामढ़ी) में हुआ था।

बिहार के मुंगेर जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर पूर्व सीता कुंड मंदिर परिसर, जहां मां सीता ने अग्नि परीक्षा दी थी।यह ऐसा रहस्यमई कुंड है कि यहां से निकलने वाला जल सदैव गर्म रहता है, वही यहां पास स्थित राम, लक्ष्मण ,भरत और शत्रुघ्न कुंड के जल शीतल ही पाए जाते हैं।

बिहार के वैशाली में भगवान महावीर ने जन्म लिया था, जो जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर थे।

भगवान बुद्ध ने वैशाली में अपना आखिरी प्रवचन भी दिया था और यहां अपने निर्वाण की घोषणा की।

लिछवी जो वैशाली के अंतर्गत आता है, यह राज्य एशिया का पहला गणराज्य माना जाता है।

दुनिया का पहला आवासीय अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय जहां विश्व के विभिन्न क्षेत्र से आए 10000 छात्र और 2000 शिक्षक रहते थे वह नालंदा विश्वविद्यालय भी बिहार में ही स्थित था।

आदि काल में यहां सम्राट अशोक, हर्षवर्धन, अजातशत्रु तथा बिंबिसार जैसे प्रतापी शासक हुए।

History of Bihar
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बिहार (History of Bihar) के मध्यकालीन क्षेत्र में हुए कुछ परिवर्तन:

मध्य काल में यहां पाल वंश,ममलूक वंश, खिलजी वंश, तुगलक वंश ने शासन किया।

11वीं शताब्दी में बख्तियार खिलजी ने सभी बौद्ध विहारों पर आक्रमण कर नष्ट कर दिया। वही विश्वप्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय को भी ध्वस्त कर दिया। कहा जाता है कि वहां उपलब्ध 9 मिलियन पांडुलिपियां और अनेक धार्मिक पुस्तकों में खिलजी द्वारा आग लगा दिए जाने पर वह लगातार तीन महीने तक जलती रही।

12 वीं शताब्दी में चेरो वंश , नुहानी वंश (14 वीं शताब्दी) में शासन किया।

वही 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध के बाद बिहार पर अफ़गानों का शासन हुआ।

14 वीं शताब्दी में बिहार पर शेरशाह सूरी का शासन स्थापित हुआ जिन्होंने प्रसिद्ध शेरशाह मकबरे का निर्माण कराया था।यही नहीं उन्होंने भारत में पोस्टल विभाग को भी विकसित किया तथा शासनकाल में भ्रष्टाचार पर नियंत्रण किया।

अपने शासनकाल में शेरशाह सूरी ने एक विशाल रोड बांग्लादेश से लेकर दिल्ली और काबुल तक सड़क निर्माण कराया, जिसे ग्रैंड ट्रंक रोड के नाम से जानते हैं।

शेरशाह सूरी के पश्चात 15 वी शताब्दी में मुगलों का शासन स्थापित हुआ, जिसके बाद बंगाल के नवाबों के हाथों सत्ता चली गई।

1757 इसी में पलासी की लड़ाई के बाद बिहार प्रांत पर अंशितः अंग्रेजों का शासन स्थापित हो गया। जिसके बाद 1764 में बक्सर की लड़ाई के पश्चात बिहार पर पूर्णरूपेण अंग्रेजी शासन स्थापित हो गया।

आधुनिक बिहार के इतिहास (History of Bihar) से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां:

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर से जो बिहार के आरा जिले के थे उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अंग्रेजो के खिलाफ बिहार में बहावी आंदोलन, नोनिया विद्रोह, लोटा विद्रोह, छोटा नागपुर का विद्रोह, तामड़ विद्रोह, हो विद्रोह, कोल विद्रोह, भूमिज विद्रोह, चेर विद्रोह, संथाल विद्रोह, पहाड़िया विद्रोह, सरदारी लड़ाई हुई,जहां बिहार वासियों ने बढ़ चढ़कर स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया।

जनजातीय विद्रोह के रूप में संगठित एवं विस्तृत विद्रोह मुंडा विद्रोह के रूप में जाना जाता है, जहां बिरसा मुंडा एक प्रभावी क्रांतिकारी के रूप में उभरे।

बिहार 1912 तक बंगाल प्रेसिडेंसी का भाग था वही अंग्रेजी सरकार ने 1912 में बंगाल प्रेसीडेंसी को विभाजित कर बिहार उड़ीसा और बंगाल प्रांत का पृथक विभाजन किया।

उसके बाद ताना भगत आंदोलन 1914 में अंग्रेजों के खिलाफ चलाया गया, वही 1917 में गांधीजी का चंपारण सत्याग्रह बिहार के चंपारण प्रांत से आरंभ हुआ, जहां नील की खेती से किसानों को निजात दिलाया गया,इसलिए इसे नील विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है।

आजादी पश्चात देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद भी बिहार के ही थे।

आजादी के बाद बिहार के मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिंह तथा उप मुख्यमंत्री के रूप में अनुग्रह नारायण सिन्हा को पद स्थापित किया गया।

बिहार वर्तमान में प्रत्येक क्षेत्र में विकास कार्य में अग्रसर है। वर्तमान में यहां अनेक दर्शनीय स्थलों का निर्माण व विकास यहां के स्थानीय सरकार द्वारा किया जा रहा है तथा युवाओं और बिहार वासियों को बेहतर विकल्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे वर्तमान मापदंडों में प्रत्येक स्तर से राष्ट्र के अनुरूप सटीक बैठ सके।

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