बिहार : 5 नए नगर निगम सहित 40 नगर परिषद और 103 नगर पंचायत की मिली मंजूरी

साल 2021 के शुरुवात में ही बिहार सरकार ने प्रदेश वासियों  को नए साल के तोहफे के रूप  शहरीकरण का तोहफा दिया है। बिहार में ऐसे सभी जगह जिनकी जनसंख्या दो लाख से अधिक है, उन सभी जगहों को नगर निकाय में शामिल कर लिया गया है। 5 नए नगर परिषद सहित 40 नगर परिषद और 103 नगर पंचायत मिली मंजूरी, जिसके बाद कुल 160 नगर निकाय में अब शहरी सुविधा मिलेंगी। 

वर्तमान सरकार की कैबिनेट में नगर एवं पंचायत निकाय अधिनियम में संशोधन कर नये नगर निकायों की स्थापना और नगर निकाय क्षेत्रो में विस्तारण को मंजूरी दे दी है।  बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास प्रधान सचिव आनंद किशोर ने बताया कि  5 नए नगर निगम सहित 40 नगर परिषद और 103 नए नगर पंचायत की मंजूरी मिली है। साथ ही 12 नगर निकायों के विस्तार भी हुआ हैं।  बिहार सरकार ने जो 8 नए नगर परिषद बनाने का फैसला लिया है, उसमें लखीसराय में सूर्यगढ़ा नगर परिषद,मधेपुरा जिले में उदाकिशुनगंज नगर परिषद, सुपौल जिले में त्रिवेणीगंज नगर परिषद,बेगूसराय जिले में बरौनी नगर परिषद, पटना जिले की बिहटा नगर परिषद और संपतचक नगर परिषद,    समस्तीपुर जिले में ताजपुर नगर परिषद और शाहपुर पटोरी नगर परिषद शामिल है। इसके साथ ही  बिहार सरकार ने 32 नगर पंचायतों को भी नगर परिषद में बदलने का फैसला लिया हैं। जिन 32 नगर पंचायतों को नगर परिषद में तब्दील करना है उनमें पटना के बिहटा और सम्पदचक, पूर्वी चंपारण का चकिया, पश्चिमी चंपारण का चनपटिया, भोजपुर का पीरो, रोहतास का नोखा और समस्तीपुर का ताजपुर शामिल है। बिहार सरकार ने 103 नए नगर पंचायत बनाने का फैसला किया है जिसमें पटना के पुनपुन और पालीगंज सहित नालंदा के 9, मुजफ्फरपुर के 7, शेखपुरा के 2, सिवान के 6, भागलपुर और सहरसा के 4, गया के 5, और सबसे ज्यादा दरभंगा के 9 नगर पंचायत शामिल है।
नगर परिषद और नगर पंचायत के साथ ही  नीतीश कैबिनेट ने बिहार में 5 नए नगर निगमो की भी स्थापना को मंजूरी दे दी है। जिसमें पश्चिमी चंपारण का बेतिया, पूर्वी चंपारण का मोतिहारी, सासाराम, मधुबनी और समस्तीपुर शामिल हैं। इसके साथ ही बिहार में नगर निगमो की संख्या अब 12 से बढ़कर 17 हो गयी हैं।
5 नए नगर निगम सहित 40 नगर परिषद और 103 नगर पंचायत की मिली मंजूरी के बाद विपक्षी दलों द्वारा इसमे ग्रामीण क्षेत्रो को शामिल करने का विरोध हो रहा हैं। उनका कहना है कि इससे कृषि योग्य भूमि और किसान तबाह होंगे साथ ही उनपर हाउस टैक्स लादकर उनका शोषण होगा।

*जिस तरह हर सिक्के के दो पहलू होते है, हर चीज कुछ नफा और नुकसान जरूर होता है उसी तरह नगर निकाय बनने से भी कुछ फायदे है तो कुछ घाटे है।* 

*नगर निकाय के फायदे*

◆ पानी, बिजली, सड़क और स्ट्रीट लाइट की बेहतर व्यवस्था मिलेगी।
◆अस्पतालों में एम्बुलेंस , डॉक्टरों  और नर्सों की संख्या के साथ सुविधा भी बढ़ जाएगी।
◆कूड़ा कचरा का प्रबधन बेहतर होगा।
◆नगर के विकास के लिए वित्त आयोग, केंद्र सरकार और राज्य सरकार से ज्यादा अनुदान मिलेगा जिससे नगर का विकास ज्यादा होगा।
◆ जमीन के दाम बढ़ेंगे, जिससे जमीन पर होम लोन या किसी भी तरह के लोन में क्रेडिट की लिमिट बढ़ जाएगी।
◆ कई सरकारी योजनाओं का लाभ बेहतर तरीके से और ज्यादा से ज्यादा लोगो को मिलेगा। जैसे – प्रधानमंत्री आवास योजना।

*नगर निगम के नुकसान*

◆ नगर निगम होने से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों मजदूरों और गरीब तबके के लोगो को होगा।
◆ किसानों की खेती प्रभावित होगी साथ ही किसानों को कृषि उपकरणों पर मिलने वाली सब्सिडी  बन्द हो जाएगी।
◆ मनरेगा के काम बंद हो जायेगी, जिससे नगर क्षेत्र के मजदूरों की 100 दिन की रोजगार की गारंटी खत्म हो जाएगी।
◆हाउस टैक्स सहित बिजली और पानी के टैक्स बढ़ जाएंगे।
◆मकान निर्माण की प्रकिया जटिल हो जाएगी। मकान निर्माण के लिए मानचित्र की स्वीकृति लेनी होगी।

आपको बता दु  नगर निगम का गठन पंचायती राज व्यस्था और नगर निगम के निगम अधिनियम 1835 के तहत होता है। नगर निगम का चुनाव लड़ने के न्यूनतम उम्र 21 वर्ष निर्धारित है। नगर निगम का बजट उस राज्य के राज्य सरकार के कैबिनेट के बैठक में तय होता है। 

साथ ही आपको बता दु की नगर निगम के निर्माण के लिए न्यूनतम जनसँख्या 3 लाख निर्धारित है। भारत मे स्थापित पहला नगर निगम का श्रेय मद्रास नगर निगम को जाता है। मद्रास नगर निगम की स्थापना  मद्रास प्रेसिडेंसी द्वारा 1687 में ब्रिटिश सरकार ने किया था। मद्रास नगर निगम ब्रिटेन के बाहर राष्ट्रमंडल देशों का पहला नगर निगम था। गौरतलब है की बिहार का सबसे पहला नगर निगम पटना नगर निगम भी एशिया के पुराने नगर निगमो में एक है। पटना नगर निगम की स्थापना 1864 में की गयीं थी।

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