कैसे रोके बिहार पलायन

बिहार पलायन की समस्या आपने पिछले blog में पड़ा, तो हमारा ये कर्तव्य बनता है कि इसके समाधान के बारे में भी अपना विचार सभी के सामने रखे। इस ब्लॉग में हमने कैसे रोके बिहार पलायन के समाधान के बारे में अपने विचार को आप सभी के साथ साझा किया है।

बिहार पलायन एक सबसे बड़ी समस्या है और इस समस्या को खत्म करने के सरकार के साथ जनता को भी कमर कसना होगा। आर्थिक मजबूरियों के कारण पनपी पलायन और स्वभाविक और शौखिया हो गया है। पलायन को रोकने के लिए सरकार को बिहार में एक ऐसा माहौल तैयार करना होगा जो उधोग और निवेशकों को आकर्षित कर सके।

उधोगपतियों और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार को आधारभूत ढांचा विकसित करना होगा। क्योंकि जबतक आधारभूत ढांचा विकसित नहीं होगा तब तक न ही कोई उधोगपति उधोग लगाएगा और न ही कोई निवेशक निवेश करेगा। सड़को का जाल बिछाना होगा बिहार के हर बड़े शहरों को रेल और सड़क नेटवर्क के जरिये देश के अन्य शहरों के साथ जोड़ने होगा ताकि परिवहन और माल ढुलाई की सुविधा बढ़े।

बिहार के शिक्षा को फिर से उसी स्तर पर लें जाना होगा जिस स्तर पर कभी नालन्दा विश्वविद्यालय और विक्रमशीला विश्वविद्यालय के समय था। हर जिले में स्कूल कॉलज खोलने होंगे साथ ही बिहार में इंजिनीरिंग कॉलेज और मेडिकल कॉलेज भी खोलने होंगे। कॉलेज खोलने के साथ ही उनमें शिक्षा के गुणवत्ता को भी बरकरार रखने की जिम्मेवारी भी सम्बंधित विभाग को लेनी पड़ेगी ताकि पढ़ाई पूरी करने बाद रोजगार भी सुनिश्चित हो सके।

बिहार पलायन एक सबसे बड़ी समस्या है और यह समस्या सिर्फ रोजगार और शिक्षा तक ही सीमित नही है। पलायन को रोकने के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का होना भी जरूरी हैं। बिहार जहाँ चमकी बुखार से सैकड़ो बच्चों की मौत हो जाती है वहाँ अत्यधिक बेड की क्षमता वाले अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के साथ ही उनमें डॉक्टरों नर्सो और सारी अत्याधुनिक सुविधाओं को बढ़ना होगा। बिहार के जहाँ देश की तीसरी सबसे बड़ी जनसँख्या रहती है वहाँ अब तक सिर्फ 2 ही AIIMS है। AIIMS के शाखाओं की संख्या बढ़ानी होगी।

रेल नेटवर्क के साथ ट्रेनों की संख्या बढ़ानी होगी। आज भी बांका और भागलपुर के लोग ट्रैन के अभाव में आने जाने की समस्या के कारण पढ़ाई और रोजगार के लिए झारखंड तो चंपारण और गोपालगंज के लोग पढ़ाई सहित रोजगार के लिए उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और बनारस के रुख करते है। इस तरह के पलायन को रोकने के लिए ट्रेन के संख्या और ट्रेन रूट को बढ़ाने होने।

गौरतलब है कि सरकार हर समय पलायन को रोकने के लिए वादा करती है नियम भी बनाती है लेकिन वो सबकुछ कागजो तक ही सीमित रह जाता है। लॉक डाउन के समय देश के हर कोने से मजदूरों का जत्था जब बिहार के तरफ चला तो सरकार ने कई तरह की नीतियां बनाई लेकिन सारे के सारे नीतियां तब असफल हो गयी जब करोना संक्रमण के बीच है बंगलौर दिल्ली की बसे बिहार से भर भर कर जाने लगी।

आपको बता दु की इसी साल फरवरी महीने में मुंबई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पापुलेशन साइंसेस नामक संस्था ने बिहार और यूपी से पलायन करने वाले लोगों को लेकर अध्ययन किया था। इस अध्ययन में संस्था ने पाया कि बिहार से लगभग हर दूसरे परिवार का कोई न कोई व्यक्ति पलायन करने के लिए मजबूर है। पलायन करने वालों में 90 प्रतिशत लोग बाहर जाकर अकुशल मजदूर का काम करते हैं। इनमें से 85 प्रतिशत लोग मैट्रिक पास भी नहीं होते। इनकी औसत आमदनी दो-ढाई हजार रुपये प्रति माह भी नहीं होती।

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बिहार पलायन एक सबसे बड़ी समस्या

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