बिहार के लोकप्रिय व्यंजन

बिहार अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरी दुनिया मे अपनी पहचान बनाये हुये हैं। सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के साथ ही बिहार के लोकप्रिय व्यंजन की अपनी अलग ही पहचान हैं। आधुनिकता के इस दौर में जहां  बड़े होटलों और रेस्तराओं में अरबियन, चाइनीज कोरियन अमेरिकन फ़ूड का स्टॉल रहता है वही अब बिहारी रसोई और बिहारी व्यंजन के नाम से भी एक अलग स्टॉल लगना शुरू हो गया हैं। बिहार के लोकप्रिय व्यंजन अब सिर्फ बिहार और उत्तर भारत तक ही सीमित नहीं रहे बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर जीआई टैग ( भगौलिक पहचान) हासिल कर अपने साथ बिहार के गौरव को बढ़ा रहे है।

*लिट्टी चोखा*
लिट्टी चोखा बिहार का सबसे लोकप्रिय भोजन है जो बिहार के साथ पूरे भारत मे आज लोकप्रिय हैं। एक तरह से लिट्टी चोखा बिहार का पहचान बन चुका है।

लिट्टी चोखा में आटे के लोई के अंदर चना का सत्तू भर कर गाय के गोबर के उपले पर शेका जाता है। सत्तू के अंदर लहसुन, प्याज़, अदरक, अजवाइन और काला नमक के महीन टुकड़े रहते है। लिट्टी को उपले के आग पर शेकने के बाद शुद्ध घी में लपेट लिया जाता हैं और आलू, बैगन और टमाटर के चोखा के साथ परोसते है।

बताया जाता है कि लिट्टी चोखे की परंपरा मौर्य काल से शुरू हुई थी। यूनानी विद्वान मेगास्थनीज के अनुसार चन्द्रगुप्त मौर्य के सैनिक जब युद्ध पर निकलते तो  रास्ते मे लिट्टी चोखा ही खाते थे क्योंकि यह बहुत ही कम ही साधन में और बहुत ही कम समय मे बन जाता है। लिट्टी चोखा बनाने के लिए बहुत ही कम पानी की आवश्यकता होती है। यह कही भी खुले जगह में बड़ी आसानी से बन जाता है।

*सिलाव का खाजा*
बिहार के लोकप्रिय व्यंजन में सिलाव खाजा को जीआई टैग हासिल है। इसका निर्माण गेहूं के आटे, मैदा, चीनी तथा इलायची इत्यादि से किया जाता है। सिलाव खाजा दरअसल सिलाव नामक स्थान के कारण पड़ा है। सिलाव नामक गाँव नालन्दा के सिलाव पहाड़ियों के बीच स्थित है।

बिहार के नालंदा जिले में सिलाव नामक स्थान है । इस स्थान पर खाजा की मिठाई बेहद प्रसिद्ध है इसलिए इस मिठाई को सिलाव खाजा के नाम से जाना जाता है।यहां का खाजा बेहद खास होता है जिसे 52 परतों में बनाया जाता है। यह मिठाई दिखने में पैटीज़ जैसी होती है लेकिन स्वाद में मीठा होती है। ऐसा माना जाता है कि सिलाव नामक स्थान के पानी मे कुछ ऐसे तत्व पाए जाते है जो इस खाजे को बेहतर स्वादिस्ट फुल्का बना देते है।

*मुजफ्फरपुर की शाही लीची*
बिहार के लोकप्रिय व्यंजन में मुजफ्फरपुर की शाही लीची को सबसे पहले जीआई टैग हासिल हुआ । मुजफ्फरपुर की शाही लीची मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों में पाई जाती है।
यह लीची मुख्यतः चायनीज मूल का फल है। कई वर्षों की शोध के बाद  गंडक के जलोढ़ मिट्टी के लिये इसकी नई प्रजातियां विकसित की गईं, जिन्हें शाही सहित अन्य नाम दिए गए। यह मई और जून के बीच पककर तैयार हो जाती है पकने के बाद यह सिंदूर की तरह लाल हो जाती है।

*चम्पारण का हांडी कबाब* बिहार के लोकप्रिय व्यंजन में हांडी कबाब एकलौता मांशाहार है। इसे अहुना मटन भी कहा जाता है। यह एक मात्र ऐसा व्यंजन है जो लगभग एक दशक से भी कम समय मे भारत सहित विदेशों में भी लोकप्रिय हो गया। पटना में पहली हांडी कबाब की दुकान 2010 में चम्पारण के राजेश और आफताब ने शुरू की थी। आज यह हांडी कबाब दिल्ली और कश्मीर के गलियों मे भी मिलने लगा है।

हांडी कबाब में मांस के छोटे छोटे टुकड़ों को मिट्टी के बर्तन में कोयले पर या उपले के आग पर पकाते है। इसमें मसाले भी पूरी तरह से देशी होते है। बताया जाता है कि चम्पारण हांडी कबाब की शुरुवात पश्चिम चम्पारण जिले के बेतिया से हुई थी। शुरुवाती समय मे नेपाल के पहाड़ियों बकरियों के मांस को मिट्टी कब बर्तन में पकाने के साथ हुई थी।

*मखाना*
मिथला का मखाना अब अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। जीआई टैग के बाद मखाना मिथला मखान के नाम से जाना जाएगा। वर्तमान में देश के 75 प्रतिशत से भी अधिक मखाना का उत्पादन मिथिला में ही हो रहा है। आयुर्वेद के अनुसार मखाना जनन शक्ति और यौन शक्ति को बढ़ाने में फायदेमंद होता है साथ ही यह शुगर के खिलाफ भी एक कारगर दवा है।

*गया का तिलकुट*
गया के रमना रोड स्थित गोपी साव को तिलकुट निर्माण शुरू करने का श्रेय दिया जाता है। गया का तिलकुट पटना और दिल्ली का मंत्री के आवास पर होने वाले मकर संक्रांति के भोज का शोभा बनता है। गया के तिलकुट की खासियत यह है कि यह काफी खास्ता होता है। यहां का मौसम और पानी तिलकुट के लिए सबसे बेहतर है इसलिए यहां के तिलकुट का स्वाद और खास्तापन कहीं और नहीं मिल पाता है।

इन सब के अलावा बिहार के लोकप्रिय व्यंजन में छठ पूजा के अवसर पर बनने वाला  ठेकुआ, बालूशाही, पेरुकिया, मनेर का लड्डू और बाढ़ की लाई भी अपने स्वाद के लिय लोकप्रिय है।

पटना और मुंगेर के बीच स्थित मनेर नामक जगह का लड्डू बिहार के पहचान के रूप में यूरोपीय देशों तक  पहुँच चुका है।

इतिहास के जानकार बताते है की पहली बार मुगल बादशाह शाह आलम अपने साथ दिल्ली से ‘नुक्ती के लड्डू’ लेकर मनेर शरीफ में पहुंचे थे जिसके बाद मनेर की लड्डू प्रचलन में आयी। मनेर की लड्डू की लोकप्रियता के कारण ही आज मनेर में लड्डू के 200 से अधिक दुकान है। मनेर स्थित मनेर स्वीट्स में आमिर खान जैसे कई बड़े अभिनेता लड्डू का स्वाद चखने आ चुके हैं। वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ भी यहां आकर लड्डू का जायका ले चुके हैं। अंग्रेजों ने मनेर के लड्डू का स्वाद चखकर इसे वर्ल्ड फेम लड्डू का दर्ज देकर प्रमाणपत्र दिया था।

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